Late Night Shayari
बड़ी प्यारी सी थी वो मुस्कराहट जो देख के किसी अपने को आई,
हम तो इसके मायने ही खो बैठे थे जब तलक चेहरे पे नहीं आई,
एक मर्तबा हो चूका था दीदार को पर जब आई तो दिल खोल के आई,
अभी तो हुआ न एक पल भी और ये पूरी एक उम्र जी आई,
बाँधा फिर हमने आशाओं की लहर को वापस वही चौराहे पर ले आई,
चल पड़े फिर कदम अपने अपने रस्ते सोचते की ज़िन्दगी इस गली क्यूँ चली आई।।।
ग़मों के इस गहरे साये में एक उम्मीद की किरण ढूँढता हूँ,
सूखा सा पड़ा है यह चेहरा एक मुस्कराहट ढूँढता हूँ,
अब तो नकाब सा बन गया है हर चेहरा मैं एक अक्स ढूँढता हूँ,
इन नकाब के पुतलों में एक वो ज़मीर ढूँढता हूँ,
वो ज़मीर जो सोया हुआ है;जग जाए;चंद ऐसे शब्द ढूँढता हूँ,
कह कर भी देखा है पर वो समझें ऐसे पल ढूँढता हूँ,
अब ख्याल ही कब आया जो बयान किया वो ख्याल ढूँढता हूँ,
ज़िन्दगी के इस मेले में खुदको खुदी में ढूँढता हूँ।।।
हम तो इसके मायने ही खो बैठे थे जब तलक चेहरे पे नहीं आई,
एक मर्तबा हो चूका था दीदार को पर जब आई तो दिल खोल के आई,
अभी तो हुआ न एक पल भी और ये पूरी एक उम्र जी आई,
बाँधा फिर हमने आशाओं की लहर को वापस वही चौराहे पर ले आई,
चल पड़े फिर कदम अपने अपने रस्ते सोचते की ज़िन्दगी इस गली क्यूँ चली आई।।।
ग़मों के इस गहरे साये में एक उम्मीद की किरण ढूँढता हूँ,
सूखा सा पड़ा है यह चेहरा एक मुस्कराहट ढूँढता हूँ,
अब तो नकाब सा बन गया है हर चेहरा मैं एक अक्स ढूँढता हूँ,
इन नकाब के पुतलों में एक वो ज़मीर ढूँढता हूँ,
वो ज़मीर जो सोया हुआ है;जग जाए;चंद ऐसे शब्द ढूँढता हूँ,
कह कर भी देखा है पर वो समझें ऐसे पल ढूँढता हूँ,
अब ख्याल ही कब आया जो बयान किया वो ख्याल ढूँढता हूँ,
ज़िन्दगी के इस मेले में खुदको खुदी में ढूँढता हूँ।।।
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